Wednesday, June 10, 2009

आसमान पे उड़ना बहुत आसान हैं

आसमान पे उड़ना बहुत आसान हैं

बस पंख लगे हो तुम्हारी छाती पर
दोनों हाथो की जगह

अपनों का डैना हो

फिर देखो विपरीत हवाओ से

कितना आसान हैं लोहा लेना

आसमान पे उड़ना बहुत आसान हैं

मैं आज ही गिरा हूँ

उड़ते उड़ते

बस एक डैना बिखर गया

11 comments:

sandhyagupta said...

Achcha likhte hain aap.Yun hi likhte rahiye.

वन्दना अवस्थी दुबे said...

स्वागत है...शुभकामनायें.

ravikumarswarnkar said...

पता नहीं क्यूं अच्छी लगी कविता....
शायद अंतिम तीन पंक्तियों की वज़ह से...

शुभकामनाएं.....

दिल दुखता है... said...

हिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका तहेदिल से स्वागत है............

AlbelaKhatri.com said...

waah waah

नारदमुनि said...

nice. narayan narayan

प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) said...

bahut sunder hai
sadar
praveen pathik
9971969084

gargi gupta said...

आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . आशा है आप अपने विचारो से हिंदी जगत को बहुत आगे ले जायंगे
लिखते रहिये
चिटठा जगत मैं आप का स्वागत है
गार्गी

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

somadri said...

अपनों का डैना हो

फिर देखो विपरीत हवाओ से

कितना आसान हैं लोहा लेना
------------------
lekin apane hi to aade hate hai...

Rajesh Sharma said...

धन्यवाद आप सभी का / मार्ग दर्शन करते रहे /